ऐसे में देश के 146 करोड़ लोगों को यानी आप सबको अब एनर्जी सेविंग लाइफस्टाइल अपनाना होगा। अब हम आपको इसके लिए आज कुछ सुझाव देना चाहते हैं। पहली सलाह आपके किचन से जुड़ी हुई है क्योंकि हमारे देश में 87% एलपीजी का इस्तेमाल हमारे देश के घरों में होता है और हम 66% एलपीजी बाहर से खरीदते हैं। अब सोचिए जहां से खरीदते हैं। अगर वहां से एलपीजी यहां आएगी नहीं। उन देशों के पास भी नहीं होगी तो हम क्या करेंगे? इसीलिए आपको सिर्फ करना यह है कि अपने घर में अपने रसोई में जरूरी चीजों की ही कुकिंग कीजिए। ऐसी डिश बनाइए जिसे पूरा परिवार एक साथ खा सके क्योंकि हर सदस्य के लिए अलग-अलग खाना अगर आप बनाने लगेंगे तो गैस की खपत आपकी बहुत बढ़ जाएगी। इसलिए कुकिंग थोड़ी कम कीजिए। आपको कोशिश करनी चाहिए कि आपका एलपीजी सिलेंडर पिछली बार की बजाय 20 से 30% तक ज्यादा चले। जैसे आपका गैस सिलेंडर अगर 30 दिन तक चलता है आमतौर पर तो कोशिश कीजिए कि इस बार वो 40 या 45 दिनों तक चले। दूसरी सलाह उन लोगों के लिए है जो गाड़ी या टू व्हीलर का इस्तेमाल करते हैं। अनावश्यक कामों के लिए कार और टू व्हीलर का इस्तेमाल [संगीत] इस अभी आप ना करें। थोड़े दिनों के लिए गाड़ी तभी निकालें जब बहुत जरूरी काम हो। आप कार पूल या बाइक पूल भी कर सकते हैं जिसमें आप अपने दोस्तों के साथ तीन-चार लोग मिलकर एक ही गाड़ी में जा सकते हैं। जिससे ईंधन बचेगा। अगर आपको ज्यादा दूर नहीं जाना है तो साइकिल या वॉक करके भी जा सकते हैं और हो सके तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कीजिए और अगर आप अपनी गाड़ी से कहीं लंबी दूरी की यात्रा की योजना बना रहे हैं तो इसे फिलहाल कुछ दिनों के लिए टाल दीजिए। हम आपको डरा नहीं रहे। हम यह नहीं कह रहे कि आप पैनिकिक मोड में चले जाइए। हमारे देश में एलपीजी, पेट्रोल या डीजल की कोई कमी इस समय नहीं है। लेकिन अगर आप अभी से अनुशासित रहेंगे, अपना ईंधन बचाएंगे, एलपीजी को बचा कर रखेंगे तो इससे आपको भी फायदा होगा और देश को भी फायदा होगा। तेल संकट का असर सिर्फ पेट्रोल, डीजल और गैस पर ही नहीं पड़ता बल्कि बिजली उत्पादन पर भी पड़ता है। इसीलिए आपको बिजली बचाने पर भी ध्यान देना चाहिए और इसके लिए आप अपने घरों में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस का अब कम से कम इस्तेमाल करें। बहुत सारे लोगों ने अभी से ही एक-एक एक्स्ट्रा सिलेंडर बचाकर रखना शुरू कर दिया है। इससे जो असली जरूरतमंद हैं उन तक गैस नहीं पहुंचेगी और जिन्हें खास जरूरत नहीं भी है उनके घरों में एक-एक सिलेंडर एक्स्ट्रा ऐसे ही रखा रहेगा। अगर देश का हर नागरिक अपनी जिंदगी में एनर्जी सेविंग मोड ऑन कर देगा तो इससे हम तेल संकट के इस असर को बहुत कम कर सकते हैं और देश की ऊर्जा बचाने में हम अपना भी [संगीत] योगदान दे सकते हैं। और इसीलिए आज हम आपसे यह कह रहे हैं कि घबराने की आवश्यकता नहीं है। पैनिकिक मोड ऑन करने की जरूरत नहीं है। आपको सिर्फ अपने जीवन में थोड़ा ज्यादा अनुशासन लाना है और आपके पास जो पेट्रोल डीजल है आपकी गाड़ी में और आपकी रसोई में जो एलपीजी गैस है उसे बस थोड़ा सोच समझ कर खर्च करना है। इस तेल संकट और खाड़ी देशों में फंसे लोगों को लेकर आज भारत सरकार ने भी कई नई जानकारियां दी हैं। हम आपको पांच बड़ी बातें बताते हैं। पहला भारत में रोजाना लगभग 55 लाख बैरल कच्चे तेल की खत खपत होती है और इससे ज्यादा मात्रा में तेल की सप्लाई इस समय हो रही है। यानी जितना हमें चाहिए उससे ज्यादा तेल अभी हमारे पास आ रहा है। दूसरा, [संगीत] इस समय लगभग 70% कच्चा तेल हॉर्मूस की खाड़ी के अलावा दूसरे रास्तों से इंपोर्ट हो रहा है और यह हमारे लिए बहुत अच्छी खबर है। क्योंकि हॉर्मूस की जो खाड़ी है अगर वह बंद भी हो जाती है तो हमारे देश पर उसका खास असर नहीं पड़ेगा क्योंकि हमारा 70% कच्चा तेल दूसरे रास्तों से आ रहा है। तीसरी बात देश की रिफाइनरीज ने एलपीजी उत्पादन औसत के मुकाबले 25% बढ़ा दिया है और एलपीजी की सप्लाई में घरेलू उपभोक्ताओं को अब ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। चौथा कालाबाजारी और अफवाहों को रोकने के लिए सरकार सभी राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है। और पांचवा पश्चिम एशिया में फंसे लोगों और यात्रियों को वापस लाने के लिए वैकल्पिक रास्ते Post Views: 1 Post navigation अभी-अभी ईरान ने इज़राइल में मचाई तबाही? किम जोंग के धमाके से ‘दहला अमेरिका’! पूरी दुनिया में तबाही का रेड अलर्ट