EPFO
पिछले कुछ हफ्तों में ईपीएफओ यानी एंप्लाइजज़ प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन ने एक साथ कई सारे बदलाव किए हैं। अगर आपकी सैलरी से पीएफ कटता है तो यह खबर सीधे आपकी जेब से जुड़ी हुई है। नया पोर्टल, नया डेटाबेस क्लेम करने का नया तरीका, इंटरेस्ट जल्दी मिलने की तैयारी और एक नई ईपीएफ स्कीम 2026। अचानक अगर घर में मेडिकल इमरजेंसी आ जाए तो कितने पैसे निकाल सकते हैं? इन सारे सवालों के जवाब आज जानेंगे। हाय, मैं हूं खबरी बाबू
EPFO क्या है?
आप किसी ऐसी कंपनी में नौकरी करते हैं जहां ईपीएफ लागू होता है तो आपकी सैलरी का एक हिस्सा हर महीने आपके पीएफ अकाउंट में जमा होता है। आपकी कंपनी भी अपनी तरफ से उसमें पैसा जमा करती है। धीरे-धीरे यह रकम बढ़ती रहती है। यही पैसा आगे चलकर रिटायरमेंट के समय आपके काम आता है। लेकिन सिर्फ रिटायरमेंट के लिए ही नहीं अगर बीच में बीमारी आ जाए, बच्चों की पढ़ाई का खर्च हो, शादी करनी हो या घर खरीदना हो, तो कुछ रूल्स ऐसे भी हैं जिनसे इसी पीएफ के पैसे का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसीलिए अगर इस पूरे सिस्टम में कोई भी बदलाव होता है तो उसका असर सीधे भारत के करोड़ों नौकरी पेशा लोगों पर पड़ता है और आज उसी की बात कर रहे हैं।
सरकार एक नया ईपीएफओ (EPFO) पोर्टल ला रही है। और कुछ खास है
सरकार एक नया ईपीएफओ पोर्टल ला रही है। लेकिन खबर सिर्फ इतनी नहीं है कि वेबसाइट का रंग रूप बदल जाएगा। अब तक ईपीएफओ का पूरा रिकॉर्ड अलग-अलग रीजनल ऑफिस में बटा होता था। मान लीजिए आपने जयपुर में नौकरी की। आपका पीएफ वहीं के रीजनल ऑफिस से जुड़ गया। कुछ साल बाद आपने नौकरी छोड़ी और हैदराबाद चले गए। अब अगर पीएफ से जुड़ी कोई दिक्कत आई तो कई बार मामला उसी पुराने रीजनल ऑफिस से जुड़ जाता था क्योंकि आपका डाटा वहीं पर होता था। यानी जिस शहर में आपने नौकरी की थी, वहीं आपका रिकॉर्ड संभल रहा था। अब यह सिस्टम बदल दिया है। ईपीएफओ ने अपने सभी मेंबर रिकॉर्ड्स को एक सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस में शिफ्ट कर दिया है। अब आपका रिकॉर्ड किसी एक शहर के कंप्यूटर में नहीं रहेगा। आपने देश के किसी भी हिस्से में नौकरी की है और बाद में किसी दूसरे राज्य में चले गए हैं तो पीएफ से जुड़ा काम कराने के लिए पुराने शहर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आपका सर्विस रिक्वेस्ट अब देश के किसी भी ऑथराइज्ड ईपीओ ऑफिस से प्रोसेस किया जा सकेगा।
EPFO 15 जुलाई तक 8.25 प्रतिशत ब्याज जमा करेगा। EPFO will credit 8.25 Percent interest by July 15
फिर आता है पीएफ का इंटरेस्ट। हर साल ईपीएफओ आपके पीएफ में इंटरेस्ट जोड़ता है लेकिन शिकायत रहती है कि इंटरेस्ट बहुत देर से आता है। कई बार अक्टूबर नवंबर तक का इंतजार करना पड़ता है। अब सरकार का कहना है कि नया पोर्टल इस पूरे प्रोसेस को तेज करेगा क्विक कर देगा। लेबर एंड एंप्लॉयमेंट मिनिस्टर मनसुख मांडविया के मुताबिक फाइनेंसियल ईयर 2025-26 का करीब 1.4 लाख करोड़ का इंटरेस्ट नए सिस्टम के जरिए ऑटो प्रोसेस किया जाएगा। उसके बाद फील्ड अथॉरिटीज उसका वेरिफिकेशन करेंगी और लक्ष्य यह है कि 15 जुलाई तक 34 करोड़ ईपीएफ अकाउंट्स 34 करोड़ उनमें इंटरेस्ट क्रेडिट हो जाएगा मिल जाएगा लेकिन सिर्फ इंटरेस्ट जल्दी आने की बात नहीं है। उसके हिसाब लगाने का तरीका भी बदला है। मान लीजिए आपको पीएफ का पूरा पैसा निकालना है। पहले क्या होता था? आपका इंटरेस्ट सिर्फ पिछले महीने के आखिरी दिन तक गिना जाता था। अगर उसके बाद आपका पैसा रिलीज होने में मान लो 10 दिन लग गए, 15 दिन लग गए, 20 दिन लग गए तो उन दिनों का इंटरेस्ट आपको नहीं मिलता था। जबकि नुकसान तो आपका होता था। आपको काफी दिन वेट करना पड़ा। अब नया नियम यह कहता है कि फाइनल पीएफ सेटलमेंट के मामले में जो इंटरेस्ट है वो पेमेंट ऑथराइजेशन की तारीख तक गिना जाएगा। यानी जिस दिन आपके भुगतान को मंजूरी मिलेगी उस दिन तक का इंटरेस्ट जोड़कर मिलेगा। मतलब इंटरेस्ट मिलने में जो एक्स्ट्रा दिन निकले, अब उन दिनों का फायदा भी मेंबर्स को मिलेगा।
अब आते हैं पीएफ क्लेम रिजेक्ट पर। क्लेम रिजेक्शन तो सबकी ही प्रॉब्लम रही है।
कभी कोई डॉक्यूमेंट कम निकल गया, कभी केवाईसी पूरी नहीं हुई। कभी कबभार तो लोगों को महीनों तक यह भी नहीं पता चलता कि उनका क्लेम आखिर अटका क्यों है। अब नए सिस्टम में सबसे पहले होगी ऑटोमेटेड प्रीवैलिडेशन। यानी आपका क्लेम सीधे अधिकारी के पास जाने से पहले सिस्टम खुद देखेगा कि कहीं कोई कमी तो नहीं है। सिस्टम में एक फीचर लाया गया है। अगर कुछ अधूरा है तो उसकी जानकारी आपको एसएमएस और ऑनलाइन पोर्टल दोनों पर मिल जाएगी। इसके साथ अगर क्लेम की जांच करते समय ईपीएफओ को आपसे कोई एक्स्ट्रा इंफॉर्मेशन चाहिए। ऐसी कोई जानकारी जो छूट गई है तो अब तक आपको ऑफिस बुलाने के बजाय ऑनलाइन क्वेरी भेज दी जाएगी। सरकार का यह कहना है कि इससे क्लेम जल्दी निपटेंगे। लोगों की भागदौड़ कम होगी और क्लेम रिजेक्शन भी घटेगा। वैसे क्लेम रिजेक्ट होने की एक और वजह थी कि लोगों को यह पता ही नहीं होता था कि वे अपने पीएफ से कम से कम कितना पैसा निकाल सकते हैं। फिर क्या? कई बार उससे ज्यादा का क्लेम डाल दिया जाता था। क्लेम रिजेक्ट हो जाता था। अब नए पोर्टल पर आप पहले से यह देख सकेंगे कि अलग-अलग क्लेम कैटेगरी में आप कितना अमाउंट निकालने के लिए एलिजिबल हैं। नए पोर्टल पर आपको एक यूनिफाइड डिजिटल इंटरफ़ेस मिलेगा। पीएफ से जुड़ी लगभग सारी जानकारी एक ही जगह दिखाई देगी। आपका मेंबरशिप रिकॉर्ड, पीएफ बैलेंस, क्लेम का स्टेटस, पेंशन से जुड़ा रिकॉर्ड और आपने अब तक कौन-कौन से फायदे लिए हैं? यह सब एक ही जगह देखने को मिलेगा। सरकार का दावा है कि अगर यह पूरा सिस्टम उसी तरह काम करता है जैसा बताया जा रहा है तो करोड़ों नौकरी पेशा लोगों के लिए पीएफ से जुड़ा सबसे बड़ा दर्द यानी देर होना, भागदौड़ और बार-बार रिजेक्शन काफी हद तक कम हो सकता है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। सरकार ने 29 जून से ईपीएफ स्कीम 1952 की जगह ईपीएफ स्कीम 2026 लागू कर दी है। यह बदलाव कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी 2020 को लागू करने की डायरेक्शन में लिए गए हैं।
क्या हुआ है सबसे बड़ा बदलाव ये जानते हैं
सबसे बड़ा बदलाव हुआ है विथड्रॉल कैटेगरीज में। पहले पीएफ से पैसे निकालने के लिए अलग-अलग वजहों की टोटल 13 कैटेगरीज थी। अब कर दी हैं सिर्फ तीन। पहली है एसेंशियल नीड्स यानी बीमारी, पढ़ाई और शादी जैसी जरूरतें। दूसरी है हाउसिंग नीड्स यानी घर खरीदना, घर बनाना, जमीन खरीदना, होम लोन चुकाना या घर की मरम्मत और रनोवेशन। और तीसरी है स्पेशल सरकमस्टेंसेस यानी ऐसी सिचुएशन, ऐसे हालात जो इन कैटेगरीज में नहीं आते। लेकिन यहां एक बात ध्यान रखने वाली है। अब भी पीएफ का पूरा पैसा हर समय नहीं निकाला जा सकता। नई स्कीम में 25% का मिनिमम बैलेंस रखना जरूरी होगा। इसे ऐसे समझिए कि आपके पीएफ अकाउंट में ₹1 लाख जमा हैं। तो कम से कम ₹ 2.5 लाख नॉर्मल सिचुएशन में आपके अकाउंट में होने ही चाहिए। हेल्थ प्रॉब्लम्स के विड्रॉल की बात करें तो अगर मेंबर खुद भी मेंबर मतलब जिसकी सैलरी से कट रहा है वो एक मेंबर हुआ ईपीएफओ का। तो अगर मेंबर खुद बीमार है या परिवार में किसी के इलाज के लिए पैसों की जरूरत है तो 12 महीने की मेंबरशिप पूरी होने के बाद पैसा निकाला जा सकता है। बात पढ़ाई और शादी की तो अगर खुद की या परिवार में किसी की पढ़ाई के लिए पैसे चाहिए तो 12 महीने की मेंबरशिप के बाद निकाल सकते हैं और मैक्सिमम 10 बार पढ़ाई के लिए पैसे निकाले जा सकते हैं। इसी तरह अगर शादी के लिए पैसा निकालना है तो मैक्सिमम ऐसा पांच बार किया जा सकता है। अब देखना यह होगा कि जिन वादों के साथ यह नया सिस्टम शुरू किया जा रहा है। क्या जमीन पर भी उतनी ही तेजी से काम करेगा?
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