छत्तीसगढ़

क्या कार्यक्रम अधिकारी के मार्गदर्शन में बनी टीम के आंख में बंधी है पट्टी

रायपुर डेस्क – सूरजपुर जिला मुख्यालय में इन दिनों कुछ बच्चे भीख मांगते हुए देखे जा रहे हैं यह बच्चे, जो कि पढ़ने की उम्र में हैं शहर के विभिन्न हिस्सों में घूम-घूम कर भीख मांगते हैं इन बच्चो की उम्र लगभग 5,7,8,9 साल के बच्चे हाथ में कटोरा लिए शहर के अलग-अलग इलाकों में जाकर लोगों से भीख मांगते हैं यह सिलसिला सूरजपुर जिला मुख्यालय में पिछले कई महीनो से लगातार चलते आ रहा है इस पर कभी प्रशासन की कोई नजर नहीं पड़ रही वही यह बताया जाता है कि इन बच्चों का समूह भैयाथान इलाके से रोज सुबह आते है और दिनभर शहर के पुराने बस स्टैंड ,चौपाटी, कोतवाली के सामने ,सुभाष चौक जैसे प्रमुख जगह पर भिक्षावृत्ति का काम करते है वहीं कई लोगों का तो यह भी कहना है कि यह बच्चे मांगते मांगते जिद पर आ जाते हैं और लोगों को असहज होकर इन्हें कुछ पैसे देने पड़ते हैं और कुछ लोग इन पर तरस खाकर पैसे देते हैं ऐसे बच्चों के पढ़ने लिखने और खेलने की उम्र में भिक्षावृत्ति करना क्या प्रशासन की लापरवाही और सरकार की योजना पर पलीता लगाता नहीं दिख रहा…

जिले के तमाम अधिकारियों का दिनभर रहता है राउंडअप

सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि बच्चों की यह भिक्षावृत्ति का कार्य पिछले कई महीनो से लगातार चल रहा है और जिला मुख्यालय के मुख्य सड़क पर ही दिनभर बच्चे रहते हैं बावजूद इसके जिला मुख्यालय में कलेक्टर ,पुलिस अधीक्षक, सहित जिले के तमाम जिम्मेदार अधिकारी इस रोड से कई बार गुजरते हैं बावजूद इसके उन अधिकारियों को इन बच्चों का यह कार्य नजर नहीं आता है या यूं कहें कि उनके गाड़ियों में चारों ओर काले पर्दे लग गए जिससे बाहर क्या हो रहा है यह नजर ही नहीं आता है यही वजह है कि आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

गठित टीम के आंख में बंधी है पट्टी….

वही इस पूरे मामले में आज जनसंपर्क विभाग की तरफ से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी किया गया जिसमें यह बताया गया कि कार्यक्रम अधिकारी के मार्गदर्शन में एक टीम गठित की गई टीम ने सूरजपुर के लगभग 25 दुकानों और प्रमुख चौक चौराहा पर भिक्षावृत्ति और बाल मजदूरी करने वालों की जांच की और इन्हें कोई भी ऐसा कृत्य करते नहीं दिखा अब इस गठित टीम के सदस्यों की कितनी प्रशंसा की जाए कि इन्हें मुख्य मार्ग पर बच्चे जो की भीख मांग रहे हैं वह इन्हें नजर नहीं आ रहे हैं ऐसे सदस्यों को आप क्या कहेंगे जिनके आंखों में पट्टी बंधी हुई है या या अपने ऑफिस में ही बैठकर पूरी जांच कर रहे हैं आम लोगों को बच्चे दिख रहे पर जांच टीम को नहीं दिख रहा…?

लाखों रुपए आते हैं उनके पास….

वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग के पास लाखों रुपए भिक्षावृत्ति, जागरूकता सहित लोगों के विकास के लिए आते हैं बावजूद उसके जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान देने के बजाय सिर्फ खाना पूर्ति करते नजर आते हैं ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या अधिकारियों के पास समय नहीं है? या अखबारों में वाह वाही छपवाना पसंद है कि यहां सब कुछ ठीक चल रहा है

नसीहत जिम्मेदारों को….

जिला मुख्यालय में बच्चों का भिक्षाटन और प्रशासन की मौन चुप्पी प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है यह बच्चों के अधिकारों की गंभीर उल्लंघना है और प्रशासन को इस पर तुरंत संज्ञान लेकर ठोस कदम उठाने चाहिए यदि यही स्थिति बनी रही, तो इन बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो सकता है।

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